Shardiya Navratri 2021 Day 3: नवरात्रि के तीसरे दिन होती है मां चंद्रघंटा की पूजा, जानें पूजा विधि, मंत्र, और कथा

Shardiya Navratri 2021 Day 3: 7 अक्टूबर 2021 से नवरात्रि की शुरुआत हो चुकी है. 9 अक्टूबर, शनिवार को तीसरा दिन है. इस दिन मां चंद्रघंटा की पूजा होती है. अगर आप विधि-विधान से मां चंद्रघंटा की उपासना करते हैं तो उनकी कृपा आप पर बरसती है. ऐसे में ये जानना बेहद ही जरूरी है की कैसे करें मां चंद्रघंटा की पूजा.

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मां चंद्रघंटा का भोग
ऐसी मान्यता है कि दूध से बनी चीज जैसे मिठाई, खीर का भोग मां चंद्रघंटा को बेहद ही पसंद होता है. ऐसे में दूध से बनी मिठाई और केसर की खीर का ही भोग लगाएं. मां को चीनी या मिश्री और पंचामृत अर्पित करना बिलकुल भी ना भूलें.

Shardiya Navratri 2021 Day 3: मां चंद्रघंटा की पूजा के दौरान पढ़ें ये मंत्र

पिण्डजप्रवरारूढा चण्डकोपास्त्रकैर्युता।
प्रसादं तनुते मह्यं चंद्रघण्टेति विश्रुता।।

या देवी सर्वभूतेषु मां चंद्रघंटा रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।

Shardiya Navratri 2021 Day 3: ऐसा होता है मां चंद्रघंटा का स्वरूप

मां दुर्गा का तीसरा रूप में चंद्रघंटा देवी शेर पर सवार रहती हैं. चंद्रघंटा माता के दस हाथ होते हैं, जिनमें आपको अस्त-शस्त्र, कमल और कमंडल देखने को मिलेगा. मां के माधे पर आधा चांद बना रहता है. यही कारण है कि इन्हें चंद्रघंटा के नाम से जाना जाता है.

नवरात्रि के तीसरे दिन इस रंग के पहने कपड़े

जो लोग मां चंद्रघंटा की पूजा करते हैं उन्हें सुनहरे या फिर पीले रंग का वस्त्र ही धारण करना चाहिए. अगर आप मां को प्रसन्न करना चाहते हैं तो पीले गुलाब और सफेद कमल की माला बनाएं और उसे मां को अर्पण करें.

ये है देवी चंद्रघंटा की आरती

नवरात्रि के तीसरे दिन चंद्रघंटा का ध्यान।
मस्तक पर है अर्ध चंद्र, मंद मंद मुस्कान।।

दस हाथों में अस्त्र शस्त्र रखे खडग संग बांद।
घंटे के शब्द से हरती दुष्ट के प्राण।।

सिंह वाहिनी दुर्गा का चमके स्वर्ण शरीर।
करती विपदा शांति हरे भक्त की पीर।।

मधुर वाणी को बोल कर सबको देती ज्ञान।
भव सागर में फंसा हूं मैं, करो मेरा कल्याण।।

नवरात्रों की मां, कृपा कर दो मां।
जय मां चंद्रघंटा, जय मां चंद्रघंटा।।

Shardiya Navratri 2021 Day 3: ये है मां चंद्रघंटा की कथा

एक बार बहुत समय पहले असुरों का आतंक बहुत ही ज्यादा बढ़ चुका था. उनका वध करने के लिए मां दुर्गा ने चंद्रघंटा का स्वरूप अपनाया. दैत्यों का राजा महिषासुर चाहता था कि वो कैसे भी राजा इंद्र के सिंहासन को हड़प ले. जिसके चलते देवताओं और दैत्यों की सेना के बीच युद्ध हुआ. महिषासुर चाहता था कि वो स्वर्ग लोक पर अपना राज कायम कर ले. इस कारण से सभी देवता परेशान हो गए. अपनी परेशानी को लेकर सभी देवता त्रिदेवों के पास पहुंच गए. देवताओं की बात सुनने के बाद त्रिदेव बहुत क्रोधित हुए, और सबने मिलकर एक हल निकाला. ब्रह्मा, विष्णु और महेश के मुख से एक ऊर्जा उत्पन्न हुई, जिसने देवी का रूप ले लिया. इस देवी को सभी देवताएं ने अपने अस्त्र-शस्त्र दिए. चंद्रघंटा रखा गया इस देवी का नाम. मां चंद्रघंटा देवताओं को बचाने के लिए महिषासुर के पास पहुंच गईं. मां चंद्रघंटा पर महिषासुर ने देखते हुए हमला किया, जिसके बाद मां ने उसका वध कर दिया.

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