Navratri History: क्यों मनाया जाता है नवरात्रि का त्यौहार और क्या है इसका इतिहास

Navratri History: हिंदू धर्म में हर साल दो बार नवरात्रि के त्योहार को सेलिब्रेट किया जाता है. चैत्र कृष्ण प्रतिपदा से पहला नवरात्र शुरू होता है जो नवमी तक चलता है. वहीं पितृ पक्ष के खत्म होने के बाद आश्विन महीने में शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से शारदीय नवरात्र शुरू होते हैं जो नवमी तक चलते हैं. इन दोनों ही नवरात्रों के दौरान मां दुर्गा के नौ रूपों की भक्तगण उपासना करते हैं और व्रत रखते हैं. बता दें किशारदीय नवरात्र के साथ धार्मिक ही नहीं बल्कि वैज्ञानिक महत्व भी जुड़ा हुआ है. कहा जाता है कि शारदीय नवरात्र के पीछे का वैज्ञानिक कारण ये है कि मौसम बदलता है हल्की सर्दी पड़ने लगती है जिससे लोगों का जीवन प्रभावित होने लगता है. ऐसे में 9 दिन का उपवास रखकर नियम और संयम का पालन किया जाता है.

पौराणिक काल से ये रीति चली आ रही है. मां दुर्गा को शक्ति का रूप माना जाता है ऐसे में उनकी साधना से मानसिक और शारीरिक संतुलन प्राप्त कर सकते हैं. मौसम में होने वाले बदलाव को सहने के लिए नवरात्र का व्रत रखकर लोग खुद को मजबूत बनाते हैं.

Navratri History: ये है नवरात्रि के पीछे का इतिहास

मां दुर्गा के नौ रूपों की साधना नवरात्र में की जाती है. इस व्रत के प्रारंभ होने के पीछे कई पौराणिक मान्यताएं बताई गई हैं. पहला तो ये है कि रावण का वध रामजी के हाथ से होना. श्रीराम से नारद जी ने अनुरोध किया था इस व्रत का अनुष्ठान करने के लिए. रामजी ने इस व्रत को पूरा करने के बाद ही लंका पर आक्रमण किया था और बाद में रावण का वध भी कर दिया था. उसी समय से कार्यसिद्धि के लिए इस व्रत को करते हैं.

इस व्रत के पीछे की दूसरी कथा ये है कि महिषासुर नामक असुर के संग प्रतिप्रदा से लेकर नवमी तक मां दुर्गा ने युद्ध किया था और उसको पराजित कर नवमी को उसका वध कर दिया था. महिषासुरमर्दिनी के नाम से मां दुर्गा को तभी से जाना जाने लगा. तब से ही नवरात्र की प्रथा प्रचलित हो गई.

ये है नवरात्र का आध्यात्मिक महत्व

ऐसी मान्यता है कि उदारात्मक और धर्मनिष्ठ सज्जनों को जग में जब-जब बुरे, क्रूर लोग प्रबल होकर छलते हैं तब धर्म स्थापना के लिए मां दुर्गा अवतार लेती हैं. इसलिए नवरात्र के व्रत को किया जाता है. ये भी कहा जाता है कि और दिनों के अनुसार मां दुर्गा की कृपा नवरात्रि के दिनों में हजार गुणा बढ़ जाती है. नवरात्रि के दौरान ज्यादा से ज्यादा श्री दुर्गादेव्यै नम: मंत्र का जाप करें.

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