Narak Chaturdashi 2021 Date: नरक चतुर्दशी तारीख और समय, जानिए पूजा विधि और महत्व समेत सभी जरूरी बातें

Narak Chaturdashi 2021 Date: पांच दिवसीय दिवाली फेस्टिवल की शुरुआत धनत्रयोदशी यानी धनतेरस से शुरू हो जाती है. ये पांच दिनों तक चलने वाला त्यौहार भैया दूज के दिन तक चलता है. धनतेरस, छोटी दिवाली, बड़ी दिवाली, गोवर्धन पूजा और फिर भाई दूज. इन पांचों त्योहार पर भारत में खूब धूम देखने को मिलती है. इन सभी त्यौहार में नरक चतुर्दशी का भी खास महत्व होता है. इस माह की चतुर्दशी के दिन अभ्यंग स्नान, जिसे नरक चतुर्दशी के नाम से जाना जाता है, ये काफी महत्वपूर्ण होता है. इस दिन स्नान करने से कहा जाता है कि नरक में जाने से बचते हैं.

ऐसा माना जाता है कि जो लोग इस दिन अभ्यंग स्नान करते हैं, वे नरक में जाने से बच सकते हैं. हिंदू मान्यताओं के अनुसार इस स्नान के दौरान उबटन, तिल, तेल का प्रयोग कर स्नान करना चाहिए, ये शरीर और आस्था के अनुरूप काफी शुभ होता है. हिंदू कैलेंडर के अनुसार नरक चतुर्दशी पूजा के दिन की बात करें तो ये दिवाली से एक दिन पहले यान लक्ष्मी पूजा के ठीक एक दिन पहले होता है.साथ ही लक्ष्मी पूजा वाले दिन भी नरक चतुर्दशी हो सकती है, यदि चतुर्दशी तिथि सूर्योदय से पहले पड़ेगी तो छोटी दिवाली अगर अमावस्या तिथि सूर्यास्त के बाद तो नरक चतुर्दशी लक्ष्मी पूजा एक ही दिन पड़ती है.

नरक चतुर्दशी का स्नान हमेशा चंद्रोदय के दौरान किया जाता है. कहा जाता है कि ये स्नान वैज्ञानिक व स्वास्थ्य के लिए भी बेहत प्रबल होता है. नरक चतुर्दशी को छोटी दिवाली, रूप चतुर्दशी और रूप चौदस के नाम से भी जाना जाता है. इस दिन को काली चौदस के रूप में भी मनाया जाता है.

Narak Chaturdashi 2021 Date: कब है नरक चतुर्दशी

नरक चतुर्दशी गुरुवार, 3 नवंबर से 4 नवंबर, 2021
अभ्यंग स्नान मुहूर्त – सुबह 05:40 से 06:03 बजे तक
अवधि – 00 घंटे 22 मिनट
अभ्यंग स्नान में चंद्रोदय – 05:40 सुबह
चंद्रोदय और चतुर्दशी के दौरान अभ्यंग स्नान
चतुर्दशी तिथि प्रारंभ – 09:02 पूर्वाह्न 03 नवंबर, 2021
चतुर्दशी तिथि समाप्त – 06:03 पूर्वाह्न 04 नवंबर, 2021

पांच दिन पूजा पाठ का कैलेंडर
धनतेरस- 2 नवंबर 2021
छोटी दिवाली- 3 नवंबर 2021
दिवाली 4 नवंबर 2021
गोवर्धन पूजा- 5 नवंबर 2021
भाई दूज – 6 नवंबर 2021

Narak-Chaturdashi-2021-Date
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Narak Chaturdashi: नरक चतुर्दशी की पूजा विधि

सूर्योदय से पहले स्नान करके साफ कपड़े धारण करें. इस दिन मंदिर की साफ सफाई करके गंगा जल छिड़के. नरक चतुर्दशी के दिन यमराजजी के साथ साथ श्री कृष्ण, काली माता, भगवान शिव, हनुमान जी और वामन जैसे देवताओं की पूजा की जाती है. ऐसा करने से घर में सुख शांति का वास होता है. सभी देवों की प्रतिमा को विराजित करें और धूप दीप, अक्षत से लेकर फल फूल अर्पित करें. नरक चतुर्दशी पर नियमों के साथ पूजा करने से यमदेव प्रसन्न होते हैं और अकाल मृत्यु का भय खत्म होता है.

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